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वाराणसी में फ्लाईओवर का गिरना और सात सितारा दफ्तर में जश्र को होना

वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो बीम गिरने की खबर जिसने में सुनी और देखी वह दहल गया। इतना दर्दनाक हादसा कइयो ने शायद अपनी जिंदगी में पहली बार देखा हो। कुछ लोग जो शाम को अपने घरों को लौट रहे थे उनके ऊपर अचानक पहाड़ सा बीम गिर जाता है। उनकी गाडिय़ां पिचक जाती हैं और उनकी जिंदगी एक पल में खत्म हो जाती है। शुरूआती खबरों में बताया कि १८ लोगों के शव मिले हैं लेकिन ५० से अधिक लोग मलबे में दबे हैं। हालांकि बचाव कार्य में लगे कई लोगों ने मरने वालों की संख्या १०० से अधिक बता रहे थे। इतने लोगों की जिंदगी को लील जाने वाला फ्लाईओवर बेहद लापरवाही से बनाया जा रहा था। जाहिर है कि इसमें भ्रष्टाचार भी खूब हुआ होगा। यह भी तय है कि इसे बनाते समय कई मजदूरों ने अपनी जान से पहले भी हाथ धो चुके होंगे। कई मजदूर अंग-भंग होकर घर पर बेकाम बैठ गए होंगे। उनके बारे में खबर नहीं दिखाई और प्रकाशित की गई। वैसे भी मजदूरों की खबर तब तक खबर नहीं होती जब तक कि वह वोट में न तब्दील हो जाएं। मजदूरों कर्मचारियों की बात करने वालों को आजकल देशद्रोही तक कह दिया जाता है। हालांकि चुनावी भाषणों में हर कोई इनका कल्याण करने की...

कृषि मेले में जादूगर का आना...और कृषि मंत्री को किसानों की हूटिंग...

रोहतक में प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित तीन दिवसीय किसान मेले के अंतिम दिन सोमवार को प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ किसानों को संबोधित कर रहे थे तो किसान उनकी हूटिंग कर रहे थे। किसानों ने कृषि मंत्री को बोलने तक नहीं दिया। इसी तरह किसानों ने केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह को भी बोलने नहीं दिया। लेकिन बीरेंद्र सिंह ढीठ निकले। उन्होंने कहा कि तुम्हें नहीं सुनना है, मत सुनो, लेकिन मैं तो बोलूंगा। वह बोले भी, लेकिन किसानों ने नहीं सुना। बाद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडगरी ने पानी और पराली के माध्यम से कुछ भावुक किस्म का भाषण दिया तो किसानों ने सुन लिया। नितिन गडकरी ने कहा कि वह पंजाब की नदियों का पाकिस्तान जा रहा पानी हरियाणा को देंगे। किसानों को लगा कि बंदे में दम है। पानी हरियाणा और पंजाब की सियासत में काफी मायने रखता है। जब भी चुनाव आता है पानी का मुद्दा प्रदेश की फिजाओं में गूंजने लगता है। सभी राजनीतिक दल इस पर अपने-अपने तरीके से वार और पलटवार की सियासत करते हैं। लेकिन समाधान आज तक नहीं निकला। हरियाणा के नेता कहते हैं कि हम अपने हिस्से का पानी लेकर रहेेंगे और पंजाब के नेता कहते...

संत मत परंपरा को तहस-नहस कर दिया गुरमीत राम रहीम ने

सचाई, ईमानदारी और समानता की नींव पर खड़े डेरे को झूठ और आडंबर का शाही महल बना दिया संत मत का अनुसरण करने वाला डेरा सच्चा सौदा आजकल सुर्खियों में है। वजह है डेरे की गद्दी पर आसीन गुरमीत राम रहीम, जिसे दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा मिली है। राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। किसी संत परंपरा वाले गुरु के लिए इससे शर्मनाक हरकत और कोई नहीं हो सकती। लेकिन गुरमीत तो संत है ही नहीं। संत और सूफी परंपरा से तो उसका कोई लेना देना ही नहीं है। उसने तो सूफी और संत परंपरा को पथभ्रष्ट ही नहीं, बल्कि तहस-नहस कर दिया। सादगी, सच्चाई, भाईचारा और समानता की पक्षधर संत परंपरा को गुरमीत ने लूट, ठगी, बेईमानी और अपराध का गढ़ बना दिया। आज न जाने कितने सच डेरा सच्चा सौदा में दफन हैं। इसमें कोई शक नहीं कि यह डेरे के करोड़ों अनुयायियों के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर कई तरह के आरोप लगे और लग रहे हैं। कुल मिलाकर संत से बाबा बने गुरमीत राम रहीम ने देश की एक ऐसी परंपरा का नाश कर दिया, जिसमें देश के बहुसंख्यक आबादी की धड़कनें बसतीं थीं। जिसक...

कर्मचारियों को नींबू की तरह निचोडऩे जा रही मोदी सरकार

साल २०१४ के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जन सभाओं में अकसर यह कहते थे कि मैं आपके सपनों को पूरा करूंगा। उन्हें सत्ता में आए तीन साल से अधिक हो गए हैं लेकिन उन्होंने देश के किस आदमी के कौन से सपने को पूरा किया है यह तो वही जानता होगा जिसके पूरे हुए होंगे। यह एक हकीकत है कि यह सराकर लगातार जनविरोधी नीतियों को लागू करती जा रही है। नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक ऐसे फैसले लिए हैं जिससे न केवल लाखों लोगों की नौकरी चली गई बल्कि कारोबार तक बंद हो गए हैं। नई नौकरियों का सृजन नहीं होने से रोजगार के अवसर भी कम हो गए हैं। इसी बीच मोदी सरकार ने एक ऐसा कानून लाया है जो कर्मचारी और मजदूर विरोधी है। इस कानून के बाद कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को ही खत्म कर दिया गया है। यह ऐसा कानून है जिसके बाद कर्मचारियों और मजदूरों को एक तरह से बंधुआ बना दिया जाएगा। जिसके पास पैसा होगा वह लोगों ने से मनमाने तरीके से काम करा सकेगा। कारखानों से लेकर दफ्तरों तक और बंदरगाहों से लेकर रेल तक में भी काम के घंटे से लेकर दिहाड़ी मजदूरी तक काम कराने वाले तय करेगा। वह जब चाहे किसी को काम पर रखे और जब ...
पनामा पेपर्स : भारत के शरीफों से कब उतरेगा नकाब? आजकल भ्रष्टाचार चर्चा में है। बिहार में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक गठबंधन टूटकर दूसरा बन गया। इसी के साथ भ्रष्टाचार पर सियासत में नैतिकता की नई परिभाषा भी लिखी गई। दूसरी ओर पड़ोसी देश पाकिस्तान में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की कुर्सी चली गई। शरीफ की कुर्सी पनामा पेपर्स की वजह से गई है। इसके बाद से भारत भी सवाल उठ रहा है कि यहां के शरीफों का नकाब कब उतरेगा? पूछा जा रहा है कि क्या भारत में भी पनामा पेपर्स में नाम आने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी? भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में शामिल होने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस्तीफा देने के दस मिनट के अंदर ही बधाई देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले पर मनमोहन सिंह की तरह मौन हैं। न तो उनकी मन की बात सुनाई दे रही है न ही ट्विटर पर अंगुलिया चल रही हैं। आखिर ऐसा क्यों हैं कि करीब पांच सौ भारतीयों का नाम पनामा पेपर्स में आने के बाद भी हमारे देश में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है? जबकि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की कुर्सी चली गई? इंटरनेशनल कन्सॉर्टियम ऑ...

अपने देश में बेगाने

साहित्य की पत्रिकाआें में जो प्रयोग रवींद्र कालिया करते हैं वह शायद ही कोई संपादक कर पाता है। अपने इसी गुण के कारण कालिया जी हमेशा में चर्चा में रहते हैं। हालांकि इस कारण उनकी यदि आलोचना खूब होती है तो गुणगान भी बहुत किया जाता है। लेकिन चर्चा में रहना राजेंद्र यादव को ही नहीं रवींद्र कालिया को भी आता है। हां, दोनों की अपनी-अपनी शैली है। रवींद्र कालिया के संपादकत्व में निकलने वाली भारतीय ज्ञानपीठ की मासिक पत्रिका नया ज्ञानोदय का मार्च २००८ अंक पश्चिीमोत्तर भारत में हिंदी लेखन पर है। जिसमें हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के कवियों और कहानीकारों की रचनाआें को स्थान दिया गया है। जाहिर है कि यह क्षेत्र बहुत बड़ा है और एक अंक में इतने बड़े भूभाग पर रचनाशील लेखकों को समेट पाना मुश्किल ही नामुकिन है। ऐसे में जो रह गए उनका नाराज होना लाजिमी है। मैं मूलत: यूपी के सुल्तानपुर जिले का निवासी हंू, लेकिन मेरा कार्यक्षेत्र पहले दिल्ली और अब पंजाब है। मैं पिछले आठ साल से अधिक समय से पत्नी बच्चों सहित जालंधर में रह रहा हंू। कालिया जी ने इस अंक में मेरी कहानी कु़डीमार को प...