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लेख : सामूहिकता, सामाजिकता और सहकारिता से निजता और एकाकीपन की ओर...

आप कृष्णा बेउरा को जानते हैं? हो सकता है कि जानते हों, लेकिन मैं नहीं जानता। इनकी शिकायत है कि इनके फेसबुक पेज पर 80 फीसदी लोग केवल संख्या बढ़ाने के लिए हैं। इनकी यह बात बिल्कुल सही है क्योंकि मेरे फ्रेंड सर्कल का यही हाल है। यहां आभासी संसार में लोग अनजान को भी दोस्ती के सर्कल में ले लेंगे लेकिन उससे कोई वास्ता नहीं रखते। यह बात वाकई समझ में नहीं आती कि जब आपका मुझसे कोई लेनादेना नहीं है या मेरे लिखे में कोई दिलचस्पी नहीं है तो मेरे घेरे में क्यों है या अपने घेरे में मुझे क्यों ले रखा है?  मेरे एक बड़े भाई जैसे मित्र ने एक दिन कहा कि मैंने लिखना बन्द कर दिया। बोले कोई पढ़ता ही नहीं तो लिखने का क्या फायदा? बात तो सही है। लेकिन यदि ऐसा ही सब सोच लें तो कम से कम हिंदी में तो कोई नहीं लिखेगा। सबको पता है कि हिंदी में कोई किसी को नहीं पढ़ता। फिर इतना लिखा क्यों जा रहा है? कुछ यूं ही लिख रहे हैं। कुछ उनके लिए लिख रहे हैं। कुछ अपने लिए लिख रहे हैं। कुछ इसलिए लिखते हैं कि बिना लिखे रहा नहीं जाता। कुछ तिकड़मबाजी के लिए लिखते हैं। कुछ पुरस्कार के लिए तो कुछ मठाधीश को प्रसन्न करने के लिए। सबकी लि...

सरकार चेते तो और जल्दी छंट जाएगा अंधेरा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों की मानें तो देश में परिवार नियोजन अपनाने वाले लोगों की संख्या में ९.४ फीसदी की वृद्धि हुई है। बढ़ती आबादी वाले इस देश के लिए इससे अच्छी खबर और या हो सकती है? बढ़ती महंगाई और घटती आय के कारण लोगों को छोटे परिवार के लिए सोचने को मजबूर किया होगा। लोगों में चेतना का एक बड़ा कारण शिक्षा के प्रसार का भी हो सकता है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि शिक्षित और संपन्न राज्यों में परिवार नियोजन कार्यक्रम के प्रति लोगों के रुझान में कमी आई है। इसके विपरीत गरीबी और अधिक आबादी के भार तले दबे राज्यों में लोगों का रुझान परिवार नियोजन के प्रति अधिक है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष २००३-०४ में देश भर में कुल ४९२४८२४ लोगों ने नसबंदी या नलबंदी कराई। लेकिन वर्ष २००४-०५ में इसमें एक फीसदी की गिरावट आ आई और ये आंकड़े ४८९५१०३ पर आ गए। वर्ष २००५ में तो नसबंदी और नलबंदी अपनाने वालों में भारी कमी दर्ज की गई। ४.१ फीसदी की गिरावट के साथ ये आंकड़े ४६९२०३२ पर पहुंच गए। लेकिन वर्ष २००७ में नसबंदी और नलबंदी कराने वालों के आंकड़े में फिर वृद्धि दर्ज की गई। करीब ५० लाख ...