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स्वतंत्र पत्रकार को मार डाला आंध्र पुलिस ने

माओवादी नेता को मारने के चक्कर में आंध्र प्रदेश की पुलिस ने शुक्रवार रात उत्तराखंड के एक युवक को भी मार डाला। स्वतंत्र पत्रकार हेम पांडे की मौत से आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले में शुक्रवार रात हुई पुलिस और माओवादी मुठभेड़ पर सवालिया निशान लग गया है। साथ यह भी सवाल उठता है कि पुलिस यदि निदोर्षों की जान लेती है तो उसे क्या कहा जाए? देश भर में आए दिन पुलिस फर्जी मुठभेड़ में लोगों को मार गिराती है। जाहिर है कि इसकी प्रक्रिया भी होती है, जोकि स्वाभाविक है। ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम पर पुलिस और सुरक्षा बल यदि निर्दोष लोगों को मार रहे हैं तो समय समय पर उसकी प्रतिक्रिया भी होती है। जवाब में पुलिस और सुरक्षा बल के जवान भी मारे जाते हैं। हालांकि इसे सही नहीं कहा जा सकता लेकिन जब पुलिस और सुरक्षा बल के जवान निर्दोष लोगों को मारते हैं तो उसे भी उचित नहीं कहा जा सकता। आंध्र प्रदेश की कथित पुलिस मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) के प्रवक्ता चेरुकरी राजकुमार उर्फ आजाद के साथ उत्तराखंड के युवक हेम पांडे के मारे जाने से कुमाऊं के लोग स्तब्ध हैं। कथित मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए उत्तराखंड लोक वाहिनी के अध्यक्ष ड...

सेहतमंदों के मुकाबले में विकलांग

हिंदी साहित्य पर फिल्मी असर : हकीकत से दूर कहानी को पुरस्कार कहावत है कि भूखे भजन न होई गोपाला, लेकिन कथादेश की अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता के प्रथम पुरस्कार विजेता प्रेम रंजन अनिमेष ने अपनी कहानी पानी-पानी में भूखे रहकर तीन युवकों से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करवा दी। शायद उन्होंने पाठकों को यह बताने का प्रयास किया है कि गरीब लोग भूखे रह कर भी अपने सपने को पूरे कर सकते हैं। यदि उनका यह मकसद है तो यही हमारी व्यवस्था भी कहती और चाहती है। सपने देखो और मेहनत के बल पर उसे पूरा करो। लेकिन जो गलाकाट प्रतियोगिता इस व्यवस्था में है उसमें तो किसी गरीब को सपने देखने और उसे मेहनत के दम पर पूरा करने को कहने का मतलब है सेहतमंद लोगों की दौड़ में किसी विकलांग को दौड़ा देना। यह व्यवस्था यही तो कर रही है। हजारों धन संपन्न जैसे सेहतमंद लोगों से करोड़ों गरीब जैसे विकलांगों को मुकाबले में उतार दिया गया है। संभत: लेखक इस व्यवस्थ का ही विरोध करना चाहता है लेकिन भाषा-शैली के प्रवाह में वह रूमानी हो गया। वह भूल गया कि किसी भी हालत में एक समय भोजन करके कोई तीन-तीन दिन तक नहीं रह सकता। ऐसे हाल में पढ़ाई क...