माओवादी नेता को मारने के चक्कर में आंध्र प्रदेश की पुलिस ने शुक्रवार रात उत्तराखंड के एक युवक को भी मार डाला। स्वतंत्र पत्रकार हेम पांडे की मौत से आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले में शुक्रवार रात हुई पुलिस और माओवादी मुठभेड़ पर सवालिया निशान लग गया है। साथ यह भी सवाल उठता है कि पुलिस यदि निदोर्षों की जान लेती है तो उसे क्या कहा जाए? देश भर में आए दिन पुलिस फर्जी मुठभेड़ में लोगों को मार गिराती है। जाहिर है कि इसकी प्रक्रिया भी होती है, जोकि स्वाभाविक है। ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम पर पुलिस और सुरक्षा बल यदि निर्दोष लोगों को मार रहे हैं तो समय समय पर उसकी प्रतिक्रिया भी होती है। जवाब में पुलिस और सुरक्षा बल के जवान भी मारे जाते हैं। हालांकि इसे सही नहीं कहा जा सकता लेकिन जब पुलिस और सुरक्षा बल के जवान निर्दोष लोगों को मारते हैं तो उसे भी उचित नहीं कहा जा सकता। आंध्र प्रदेश की कथित पुलिस मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) के प्रवक्ता चेरुकरी राजकुमार उर्फ आजाद के साथ उत्तराखंड के युवक हेम पांडे के मारे जाने से कुमाऊं के लोग स्तब्ध हैं। कथित मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए उत्तराखंड लोक वाहिनी के अध्यक्ष ड...
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