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केवल संख्या मत बनिये

आप कृष्णा बेउरा को जानते हैं? हो सकता है कि जानते हों, लेकिन मैं नहीं जानता। इनकी शिकायत है कि इनके फेसबुक पेज पर 80 फीसदी लोग केवल संख्या बढ़ाने के लिए हैं। इनकी यह बात बिल्कुल सही है क्योंकि मेरे फ्रेंड सर्कल का यही हाल है। यहां आभासी संसार में लोग अनजान को भी दोस्ती के सर्कल में ले लेंगे लेकिन उससे कोई वास्ता नहीं रखते। यह बात वाकई समझ में नहीं आती कि जब आपका मुझसे कोई लेनादेना नहीं है या मेरे लिखे में कोई दिलचस्पी नहीं है तो मेरे घेरे में क्यों है या अपने घेरे में मुझे क्यों ले रखा है?  मेरे एक बड़े भाई जैसे मित्र ने एक दिन कहा कि मैंने लिखना बन्द कर दिया। बोले कोई पढ़ता ही नहीं तो लिखने का क्या फायदा? बात तो सही है। लेकिन यदि ऐसा ही सब सोच लें तो कम से कम हिंदी में तो कोई नहीं लिखेगा। सबको पता है कि हिंदी में कोई किसी को नहीं पढ़ता। फिर इतना लिखा क्यों जा रहा है? कुछ यूं ही लिख रहे हैं। कुछ उनके लिए लिख रहे हैं। कुछ अपने लिए लिख रहे हैं। कुछ इसलिए लिखते हैं कि बिना लिखे रहा नहीं जाता। कुछ तिकड़मबाजी के लिए लिखते हैं। कुछ पुरस्कार के लिए तो कुछ मठाधीश को प्रसन्न करने के लिए। सबकी लि...

लेख : सामूहिकता, सामाजिकता और सहकारिता से निजता और एकाकीपन की ओर...

आप कृष्णा बेउरा को जानते हैं? हो सकता है कि जानते हों, लेकिन मैं नहीं जानता। इनकी शिकायत है कि इनके फेसबुक पेज पर 80 फीसदी लोग केवल संख्या बढ़ाने के लिए हैं। इनकी यह बात बिल्कुल सही है क्योंकि मेरे फ्रेंड सर्कल का यही हाल है। यहां आभासी संसार में लोग अनजान को भी दोस्ती के सर्कल में ले लेंगे लेकिन उससे कोई वास्ता नहीं रखते। यह बात वाकई समझ में नहीं आती कि जब आपका मुझसे कोई लेनादेना नहीं है या मेरे लिखे में कोई दिलचस्पी नहीं है तो मेरे घेरे में क्यों है या अपने घेरे में मुझे क्यों ले रखा है?  मेरे एक बड़े भाई जैसे मित्र ने एक दिन कहा कि मैंने लिखना बन्द कर दिया। बोले कोई पढ़ता ही नहीं तो लिखने का क्या फायदा? बात तो सही है। लेकिन यदि ऐसा ही सब सोच लें तो कम से कम हिंदी में तो कोई नहीं लिखेगा। सबको पता है कि हिंदी में कोई किसी को नहीं पढ़ता। फिर इतना लिखा क्यों जा रहा है? कुछ यूं ही लिख रहे हैं। कुछ उनके लिए लिख रहे हैं। कुछ अपने लिए लिख रहे हैं। कुछ इसलिए लिखते हैं कि बिना लिखे रहा नहीं जाता। कुछ तिकड़मबाजी के लिए लिखते हैं। कुछ पुरस्कार के लिए तो कुछ मठाधीश को प्रसन्न करने के लिए। सबकी लि...

कृषि मेले में जादूगर का आना...और कृषि मंत्री को किसानों की हूटिंग...

रोहतक में प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित तीन दिवसीय किसान मेले के अंतिम दिन सोमवार को प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ किसानों को संबोधित कर रहे थे तो किसान उनकी हूटिंग कर रहे थे। किसानों ने कृषि मंत्री को बोलने तक नहीं दिया। इसी तरह किसानों ने केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह को भी बोलने नहीं दिया। लेकिन बीरेंद्र सिंह ढीठ निकले। उन्होंने कहा कि तुम्हें नहीं सुनना है, मत सुनो, लेकिन मैं तो बोलूंगा। वह बोले भी, लेकिन किसानों ने नहीं सुना। बाद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडगरी ने पानी और पराली के माध्यम से कुछ भावुक किस्म का भाषण दिया तो किसानों ने सुन लिया। नितिन गडकरी ने कहा कि वह पंजाब की नदियों का पाकिस्तान जा रहा पानी हरियाणा को देंगे। किसानों को लगा कि बंदे में दम है। पानी हरियाणा और पंजाब की सियासत में काफी मायने रखता है। जब भी चुनाव आता है पानी का मुद्दा प्रदेश की फिजाओं में गूंजने लगता है। सभी राजनीतिक दल इस पर अपने-अपने तरीके से वार और पलटवार की सियासत करते हैं। लेकिन समाधान आज तक नहीं निकला। हरियाणा के नेता कहते हैं कि हम अपने हिस्से का पानी लेकर रहेेंगे और पंजाब के नेता कहते...

कम कीमत वाली मौतें हो भी जाएं तो क्या गम

सरकार की मानसिकता को अभिव्यक्त करते हैं आए दिन हो रहे रले हादसे फिर एक रेल हादसा। ६६ लोगों की मौत। करीब १५० लोग घायल। लगभग ४० लोगों की हालत गंभीर। रेल मंत्री ममता बनर्जी के १४ माह के कार्यकाल में यह १०वां रेल हादसा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हादसों के लिए रेलमंत्री जिम्मेदार हैं। लेकिन मंत्रालय के प्रति उनकी गंभीरता का अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है। आए दिन हो रहे रेल हादसे हमारी सकार की संवेदना, उसकी प्राथमिकता और उसके नजरिये को भी स्पष्ट करते हैं। अब तक हुए रेल हादसों पर यदि गौर किया जाए तो यही तथ्य सामने आता है कि अधिकतर मध्यम वर्ग और गरीब लोगों के लिए चलने वाली ट्रेनें ही दुर्घटनाग्रस्त होती हैं और लेट भी चलती हैं। एक खास वर्ग के लिए चलाई जाने वाली रेल गाडिय़ां न तो देरी से चलती हैं न ही उनकी सुरक्षा के प्रति कोई अंगभीरता दिखाई जाती है। इसे रेल मंत्रालय और रेलवे का हर कर्मचारी जानता है कि गरीबों के लिए चलने वाली ट्रेनें देरी से चलें या हादसाग्रस्त हो जाएं उससे उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पडऩे वाला। ऐसे लोगों की मौत की कोई कीमत नहीं है। कुछ लाख मुआवजा देकर और दो चार बयान देकर मामले क...