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अक्तूबर, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आगे बढ़ती भूख की कहानी

निष्ठा चुघ लंदन से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए दुनियाभर में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं बहुत सालों पहले एक तस्वीर देखी थी. एक गिद्ध और एक बच्चा. लुपलुपाती आँखों वाला एक निर्मम माँसखोर पक्षी और उससे थोड़ी ही दूर ज़मीन पर हड्डियों के ढांचे पर खींचखांच कर थोड़ी सी चमड़ी पहने इंसान का एक बच्चा. दोनों ही भूखे थे. इस विषय पर अप

पूँजीवाद के भविष्य पर सवालिया निशान

मुकेश शर्मा बीबीसी संवाददाता इस आर्थिक संकट में सरकारी हस्तक्षेप ने पूँजीवाद के भविष्य पर सवालिया निशान लगाए हैं दुनिया भर में गहराते आर्थिक संकट के संदर्भ में इन दिनों पश्चिमी देशों में चर्चा गर्म है पूँजीवाद को लेकर. अमरीकी सरकार और यूरोप में सरकारें जिस तरह बैंकों को बचाने के लिए बड़े-बड़े आर्थिक पैकेज दे रही हैं उसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या पूँजीवाद का स्वरूप बदल गया है या पूँजीवाद समाप्त हो रहा है.

गिरते शेयर बाजार में डूबते लोग

बिना आधार के सपनों का ऐसा ही ध्वंस होता है शेयर बाजार से मुनाफा कमाने वाले आजकल मुश्किल में हैं। अमेरिका के कुछ बैंकों के दिवालिया होने तथा बिक जाने के कारण पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में हाहाकार की स्थिति है। वैसे तो वैश्विक मंदी का रोना रोया जा रहा है, लेकिन अधिक असर शेयर बाजारों पर ही दिखाई दे रहा है। शेयर बाजार के दम पर अपनी वित्तीय पूंजी बढ़ाने वाली कंपनियों को कराे़डों-अरबों का नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं इस आंधी से आम निवेशक भी परेशान है। उसे भी काफी घाटा हुआ है। सोमवार यानी छह अ तूबर २००८ को मंुबई शेयर बाजार ७२४ अंकों की गिरावट के साथ ११८०१ अंकों पर बंद हुआ। बताते हैं कि जनवरी २००८ के उच्चतम स्तर से अब तक ४३ फीसदी की गिरावाट सेंसे स में दर्ज हो चुकी है। विश्लेषकों को अश्चर्य हो रहा है कि अमेरिकी सरकार द्वारा ७०० अरब डालर का राहत पैकेज घोषित किए जाने के बावजूद शेयर बाजारों में रौनक यों नहीं लौट रही है। इसी तरह अधिकतर निवेशक भी हैरान हैं। दरअसल, जिस तरह से कई अमेरिकी बैंकों की हालत एकदम से खराब हुई उससे निवेशक सकते में हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है कि ऐसा भी हो सकता