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बिहार के सियासी शोकगीत की हकीकत बिहार में नीतीश कुमार के महागठबंधन का साथ छोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाने को बहुत सारे लोग सही बता रहे हैं। ऐसे लोग किसी हद तक सही हो भी सकते थे यदि वह यह नहीं कहते कि नीतीश कुमार ने अपनी बेदाग छवि बचाने के लिए ऐसा किया है। चूंकि लालू प्रसाद यादव के बेेटे और सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है तो वह सरकार नहीं चला पा रहे थे। इस्तीफा देने के बाद नीतीश ने कहा भी कि कफन में थैली नहीं होती और लालच की कोई सीमा नहीं होती और लोकतंत्र लोकलाज से चलता है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार बचाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने लालू का समर्थन किया, जिसका मतलब है कि भ्रष्टाचार का समर्थन करना। नीतीश ने इस्तीफा दिया तो पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्विट करके बधाई दी। कहा कि भ्रष्टाचार की लड़ाई में उनका स्वागत है। दरअसल, यह सारे तर्क अपनी सुविधानुसार गढ़े गए हैं। यह सब वैसे ही है जैसे अपराध करने वाला अपने पक्ष में तर्क देता है। हकीकत यह है कि नीतीश कुमार महागठबंधन में सहज नहीं थे। उनकी मनमानी नहीं चल रही थी। बाजवजूद इस...

बाजार व्यवस्था में छटपटता इनसान

इनसान अपनी ही बनाई व्यवस्था में छटपटा रहा है। विकास की चाह में खुद को बाजार के हवाले करने वाला आदमी आज बाजार की चाल से जार-जार रो रहा है। वित्तीय कंपनियां दिवालियां हो रही हैं और शेयर बाजार फर्श पर लोट रहा है। एक ही दिन में कराे़डों-अरबों का वारा-न्यारा हो जा रहा है। कुछ दिन पहले तक खबरें दुनिया में अरबतियों की बढ़ती संख्या पर आ रही थीं आज अरबों के खाक होने की आ रही हैं। हालात ने सिद्ध कर दिया कि बाजार की भूख को शांत करने लिए पंूजी चाहिए। बाजार की कोई सीमा नहीं, लेकिन पंूजी की है। यहीं से मांग और आपूर्ति में असंतुलन पैदा हो जाता है। ऐसा होते ही बाजार खूंखार हो जाता है। वह ऐसी सांस लेता है कि धरती का विवेकशील प्राणी मनुष्य उसके उदर में समा जाता है। ऐसे हालात इसलिए आते हैं कि मनुष्य अपना विवेक ताक पर रखकर विकास की गति पर सवार हो जाता है। इसी को कहते हैं शेर की सवारी। जब तक आप शेर के ऊपर बैठे हैं तब तक तो ठीक, लेकिन नीचे गिरते ही शेर आपको निगल जाएगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि दुनिया को अपने चाबुक से चलाने वाले इससे कुछ सबक सीखेंगे। सबक उन्हें भी सीखने की जरूरत है जो वैश्वीकरण का अंधानुकरण क...