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उनकी नजाकत पर आंकड़ों की नफासत तो देखिए

- ओमप्रकाश तिवारी आंकड़े बेजुबान होते हैं लेकिन बहुत कुछ कहते हैं। बेदर्द लगते हैं पर संवेदनशील होते हैं। तस्वीर नहीं होते लेकिन तस्वीर बनाते हैं। आईना नहीं होते लेकिन तस्वीर दिखाते हैं। कलाकार नहीं होते लेकिन कलाकारों के औजार होते हैं। बेजान दिखते हैं लेकिन उनमें कई सच धड़कता है। चतुर सुजान अपना सच उनके माध्यम से छिपाते हैं और भ्रम फैलाते हैं लेकिन आंकड़ों की अदा देखिए कि वह सच ही कहते हैं और सच ही दिखाते हैं। योजना आयोग का कहना है कि देश से गरीबी घट रही है। करोड़ों बिलबिलाते और तिलतिल कर मरने वालों के देश में सचमुच यह खुश होने वाली खबर है। क्या यह सच है या हकीकत पर खुशफहमी का परदा डालने की नादान होशियारी है। योजना आयोग कहता है कि यदि कोई शहरी प्रतिदिन 28 रुपये 65 पैसे खर्च करता है तो वह गरीब नहीं है। जबकि गांवों में 22 रुपये 42 पैसे खर्च करने वाले को गरीब नहीं कहा जा सकता। इस तरह महीने में 859 रुपये 60 पैसे खर्च करने वाला शहरी और 672 रुपये 80 पैसे खर्च करने वाला ग्रामीण गरीब की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। आप सरकार हैं। कोई भी श्रेणी बनाएं और उसमें डाल दें। गरीब आदमी क्या कर सकता है?...

बंद बोतल में पुरानी शराब

लोकपाल एक बार फिर चर्चा में है। ऐसे में इसके बारे में कुछ जानकारियां काफी दिलचस्प हैं। मैंने यह लेख सितंबर २००४ में लिखा थ। नवभारत टाइम्स से इसे अपने ४ सितंबर २००४ के अंक में प्रकाशित किया था। ऐसा नहीं है कि लोकपाल आज का मुद्दा है। समय -समय पर यह मामला आता रहा है। इस लेख को पढ़कर इसे समझा जा सकता है। - ओमप्रकाश तिवारी लोकपाल का मामला एक बार फिर उठा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से लोकपाल की नियुक्ति में देरी का कारण बताने को कहा है। पिछले दिनों अदालत ने महान्यायवादी हरीश साल्वे से पूछा कि अखबार खोलने पर रोज एक नया घोटाला सामने आता है , तो ऐसे में क्या यह ठीक नहीं होगा कि सार्वजनिक जीवन में पांव पसारते भ्रष्टाचार के मद्देनजर लोकपाल की नियुक्ति कर दी जाए। इस पर श्री साल्वे ने पिछले साल लोकसभा में पेश हो चुके लोकपाल विधेयक का जिक्र किया। अब देखना यह है कि सरकार क्या कदम उठाती है। यह बड़े दुर्भाग्य की बात...

आचरण के आईने में गलत-सही का द्वंद्व

मुख्य चुनाव आयुक्त डाक्टर एसवाई कुरैशी ने पिछले दिनों कहा कि पूरी दुनिया इस बात की तारीफ करती है कि भारत जैसे विविधता वाले और ७१ करोड़ से अधिक मतदाता वाले देश में सफलतापूर्वक चुनाव सम्पन्न हो जाते हैं। लेकिन जब वह यह कहते हैं कि आपकी व्यवस्था में अपराधी संसद और विधानसभाओं में चुनकर क्यों आ जाते हैं, तो हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। उन्हें यह तर्कसंगत नहीं लगता कि कानून के अनुसार अंतिम अपील कोर्ट में दोषी सिद्ध होने तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। इस द्वंद्व और अंतर्विरोध को हम इस तरह से समझ सकते हैं। जिसकी जैसी मानसिकता उसका आचारण भी वैसा ही होता है। आदमी के आचारण में ही उसकी मानसिकता परिलक्षित होती है। भ्रष्ट मानसिकता वाला भ्रष्टाचार की संस्कृति को ही पुष्पित-पल्वित करता है। अपराध की मानसिकता वाला अपराध की गंगा-जमुना बहाने में ही पूरी जिंदगी लगा रहता है। इसी तरह अपराधी और भ्रष्टाचारी के आचरण से ही हम उसकी मानसिकता को समझ सकते हैं। ऐसी मानसिकता और ऐसे आचरण वाले किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक होते हैं। इसलिए ऐसे लोगों की जगह नागरिक समाज में नहीं होनी चाहिए। बेशक इस तरह के अधिकतर लोग...

चित्तौड़गढ़ में राजस्थानी कवि का सम्मान

महाराज शिवदान सिंह का एकल काव्य पाठ मेवाड़ के बहुत गहरी समझ वाले राजस्थानी के सादे विचारों वाले साहित्यकार महाराज शिवदान सिंह के दोहों को लेकर चित्तौडगढ में सेंथी स्तिथ डॉ. सत्यनारायण व्यास के निवास स्थान पर पंद्रह अगस्त की शाम चार बजे नगर के प्रबुद्ध लोगों के बीच एकल काव्य पाठ आयोजित किया गया.बहुत अरसे के बाद नगर में हुए इस काव्य पाठ के पहले सत्र में कवि शिवदान सिंह के विस्तृत परिचय के साथ ही संभागियों का स्वागत डॉ. व्यास ने किया.अभी तक प्रकाशित अपनी तीन किताबों की प्रतिनिधि रचनाओं को पढ़ते हुए कवि सिंह ने श्रोताओं को भाव विभोर किया. सिंह ने दोहे पढ़ने से पहले अपने कवि बनने तक का का सफ़र व्यंग शैली में जताया .कुछ गहरी समझ और कुछ नए नवेले श्रोताओं को ये काव्य पाठ अलग अलग स्तर पर प्रभावित करता रहा. मूल रूप से भीलवाड़ा जिले के कारोई के महाराजा होते हुए भी फूटपाथ की सी रचनाएँ करते हुए शिवदान सिंह ने जीवन की अनुभूतियों को बहुत गंभीरता के साथ अपने साहित्य कर्म में समेटा है.सतत्तर सालों की उम्र पार कवि सिंह बेहद सरल और मृदुभाषी है.राजस्थानी के साथ-साथ वे मूर्तिकला और चित्रकारी में भी मह...

मधुरेश, ज्योतिष जोशी और डॉ.शोभाकांत झा को प्रमोद वर्मा सम्मान

द्वितीय प्रमोद वर्मा स्मृति समारोह-2010 वाणी परमार को प्रथम शोध वृति अज्ञेय और शमशेर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी रायपुर । प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा हिन्दी आलोचना में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2010 का प्रमोद वर्मा सम्मान प्रख्यात कथा-आलोचक मधुरेश और युवा आलोचक ज्योतिष जोशी को प्रदान किया गया । इसके अलावा प्रमोद वर्मा रचना सम्मान से वरिष्ठ ललित निबंधकार डॉ. शोभाकांत झा को अंलकृत किया गया तथा वाणी परमार को एक वर्ष की शोधवृत्ति प्रदान की गई । प्रेमंचद जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रतिष्ठित रचनाकार-आलोचक द्वय डॉ. धनंजय वर्मा और नंदकिशोर आचार्य ने क्रमश- 21, 11 व 7 हज़ार रुपये की नगद राशि, स्मृति चिन्ह, अलंकरण पत्र प्रदान कर रचनाकारों का सम्मान किया । इस प्रतिष्ठित सम्मान के चयन समिति के सदस्य थे – केदार नाथ सिंह, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, विजय बहादुर सिंह, डॉ. धनंजय वर्मा व विश्वरंजन । इसके पूर्व यह सम्मान श्रीभगवान सिंह और कृष्ण मोहन को मिल चुका है । 1965 से आलोचना कर्म में सक्रिय श्री मधुरेश ने कहा कि उनकी सोच साहित्य में सकारात्मकता से है । रचना और आलोचना में ईमानदारी पर बल दिये ब...

मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती

बाढ़ । मगही कवि स्व. योगेश्वर सिंह योगेश की पुण्यतिथि समारोह के मौके पर बीती रात नीरपुर गांव मे अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता साहित्यकार (magahi akadami ke adhyaksh) उदय शंकर ने की जबकि संचालन मगही के चर्चित कवि रामाश्रय झा ने किया। सम्मेलन मे बिहार व यूपी की विभिन्न जगहो से आये साहित्य- काव्य के कई दिग्गज पुरोधा शामिल हुए। कवियो की व्यंगात्मक व समाजिक कुरितियो पर प्रहार करती काव्य रस की सुर सरिता मे श्रोतागण देर रात तक झूमते रहे। हिसुआ से आये चर्चित कवि दीनबंधु, कवि कारू गोप, जयराम जी, व गोपालगंज के पंकज जी समेत अन्य साहित्यकारो ने सामाजिक अव्यवस्था पर चोट करती कविता पाठकर लोगो को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस मौके पर कवि योगेश फाउंडेशन के द्वारा मगही मंडल के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामनंदन जी को 2010 का योगेश शिखर सम्मान प्रदान किया गया। एक साथ जुटे मगही साहित्य के दिग्गजो ने इस मौके पर घोषणा किया कि कवि स्व. योगेश की जयंती 23 अक्टूबर को मगही दिवस के रूप मे मनाया जायेगा। समापन समारोह को संबोधित करते हुए मृत्युंजय कुमार ने कहा कि कवि योगेश जी क...

वापस ली गईं नया ज्ञानोदय की प्रतियां

ज्ञानपीठ की साहित्यिक पत्रिका में विभूति नारायण राय के विवादास्पद साक्षात्कार में लेखिकाओं के बारे में की गई टिप्पणी के बाद उठे तूफान को शांत करने के लिए बाजार से नया ज्ञानोदय की विवादित प्रतियां वापस ले ली गई हैं। इसके संपादक रवीन्द्र कालिया ने इस पूरे मामले के लिए हिंदी समाज से क्षमा मांगी है। ज्ञानपीठ के निर्देशक रवीन्द्र कालिया ने कहा कि बाजार में बची हुई नया ज्ञानोदय पत्रिका की प्रतियां वापस ले ली गई हैं और साक्षात्कार के हिस्से को हटाकर दो एक दिन में इसे फिर से प्रकाशित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह के सिलसिले में गोवा प्रवास में होने के कारण वह अपने संपादकीय दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सके, जिसके चलते पत्रिका में यह भूल चली गई।